🔱 1️⃣ शिव–सती विवाह तिथि (रुद्र संहिता – सती खंड)
रुद्र संहिता, सती खंड के अनुसार:#Mahashivratri
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मास: चैत्र
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पक्ष: शुक्ल
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तिथि: त्रयोदशी
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वार: रविवार
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नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी
अर्थात भगवान महेश्वर का विवाह चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ बताया गया है — जो फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) नहीं है।#Mahashivratri
🌸 2️⃣ शिव–पार्वती विवाह तिथि (रुद्र संहिता – पार्वती खंड)#Mahashivratri
वशिष्ठ जी हिमालय को बताते हैं:
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मास: मार्गशीर्ष
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वार: सोमवार
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नक्षत्र: रोहिणी
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शुभ लग्न, चंद्रमा बुध के साथ
यह भी स्पष्ट रूप से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी नहीं है।#Mahashivratri
🌑 3️⃣ फिर महाशिवरात्रि पर क्या हुआ था?
शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता (अध्याय 8) के अनुसार:
👉 इसी दिन भगवान शिव ने
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ब्रह्मा और विष्णु को
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अपने अनंत ज्योतिर्लिंग स्वरूप का दर्शन कराया#Mahashivratri।
यही वह क्षण था जब
निराकार से साकार का प्राकट्य हुआ
और ब्रह्मा-विष्णु के अहंकार का नाश हुआ।
इसीलिए यह रात्रि —
🌌 शिव के अनंत, अजन्मा, अनादि स्वरूप के प्राकट्य की रात्रि कहलाती है।
इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा गया।#Mahashivratri
🔥 तो विवाह की कथा कहाँ से जुड़ी?
लोक परंपराओं, कथाओं और कुछ क्षेत्रीय मान्यताओं में शिव-पार्वती विवाह को महाशिवरात्रि से जोड़ा गया,
लेकिन शास्त्रीय प्रमाण (पुराणोक्त तिथियाँ) इसे समर्थन नहीं करते।
✨ निष्कर्ष
✔ महाशिवरात्रि = शिव के ज्योतिर्लिंग प्राकट्य की रात्रि
❌ शिव-पार्वती विवाह दिवस नहीं
✔ विवाह की तिथियाँ अलग-अलग मासों में वर्णित हैं#महाशिवरात्रि
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