
वृष🐂 TAURUS (ई, उ, ए, ओ, वा, वि, वू, वे, वो)
शुभ रंग सफेद,
शुभ अंक 6
शुभ रत्न हीरा व सफेद पुखराज,
शुभ वार शुक्रवार, बुध व शनि,
ईष्ट महालक्ष्मी, संतोषी माता।
शुभ तारीख 6, 15, 24।
शुभमास ज्येष्ठ,
सामान्य मास श्रावण, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष माघ, फाल्गुन,
अशुभ मास चैत्र, वैशाख, आषाढ़ व भाद्रपद।
व्यक्तित्त्व गुरुभक्त, कृतज्ञ, दयालु।
सकारात्मक पक्ष आकर्षक पहनवा, वस्त्रआभूषण में रूचि।
नकारात्मक पक्ष कानो का कच्चा, दुराग्रही, आलसी।
वृष लग्न में जन्म लेने वाला जातक शरीर से बलिष्ठ और पुरुषार्थी होता है । रंग गेहुआ होता है । ऐसे व्यक्ति अधिक लंबे नहीं होते हैं । ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास एवं कर्म प्रधान होते हैं । चेहरा गौर वर्ण और लंबा होता है । होंठ जरूरत से ज्यादा मोटे तथा कान और आंखें लंबी होती है । ऐसे व्यक्ति का चेहरा आकर्षक होता है तथा उन्नत ललाट एवं लंबे हाथ होते हैं । ऐसे व्यक्ति हर समय नवीन शोध में लगा रहता है । खाली बैठना इन्हें पसंद नहीं होता है ।
स्वभाव
यह स्वभाव से गंभीर एवं कम मित्र रखने वाला होता है । यदि गलती से अनुचित कार्य हो जाये तो बाद में घंटों पछताता रहता है । इस लग्न में जन्म लेने वाले व्यक्ति की प्रवृतियां सांढ़ की भांति होती है । बिना इच्छा के यह किसी की भी बात नहीं सुनते हैं । इनके जीवन में स्वयं निर्मित कुछ सिद्धांत होते हैं और उन सिद्धांतों का नियमों का दृढ़ता से पालन करते हैं । इनमें गजब का आत्मविश्वास अपने आप पर नियंत्रण रखने की शक्ति और विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ता पूर्वक अग्रसर होते रहने की भावना विद्यमान रहती है । जिसके फलस्वरूप यह वर्तमान को अपने अनुकूल बना लेते हैं । अपने आप में मस्त और धुन के पक्के होते है । यह केवल कल्पना में ही जीवित नहीं रहते हैं बल्कि उनके पांव व्यवहारिकता की ठोस शिला का आधार लिए हुए होते हैं । बहुत सोचने विचारने के बाद यह अपनी योजना बनाते हैं और जब एक बार योजना बना लेते हैं तो फिर उसका दृढ़ता से पालन करते हैं । मन और मस्तिष्क दोनों पर सफल नियंत्रण होने से यह शीघ्र ही उन्नति कर लेते हैं तथा सर्वदा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहना ही इनके जीवन का ध्येय बन जाता है । जिस काम को एक बार छेड़ देते है उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं । ऐसे जातक अड़ियल स्वभाव के होते हैं ।
ऐसे व्यक्ति निरंतर योजनाएं बनाते रहते हैं तथा अपने ही विचारों को मूर्त रूप देने में सदा तत्पर रहते हैं । इनका व्यक्तित्व भव्य और कार्य करने की शैली नूतन होती है। इस प्रकार के व्यक्ति गायन संगीत आदि कलाओं में रुचि रखते हैं तथा विभिन्न प्रकार के भोग भोगने में प्रवृत्त रहते हैं । इनका जीवन कलाकार की रेखा छूने लगता है परंतु जीवन में सफल कलाकार नहीं बन पाते हैं । ऐसे व्यक्ति को बहुत अधिक संतान का सुख प्राप्त नहीं होता है । 54 वें वर्ष के बाद अपने आप में अकेलापन और हीनता की भावना सी पाने लगते हैं । फिर भी इनका जीवन सफल एवं सुखी कहा जा सकता है ।
वृष में ग्रहों का महत्व
सूर्य आपकी कुंडली में माता , भूमि , भवन एवं घरेलू सुख के स्वामी होते हैं । सूर्य आपकी कुंडली में कारक ग्रह होते हैं ।
चन्द्रमा आपकी कुंडली में छोटे भाई-बहन एवं पराक्रम के स्वामी होते हैं । चंद्रमा यदि पापी ग्रह से पीड़ित हो जाए तो मानसिक परेशानी , साँस से संबन्धित रोग एवं माता के सुख में कमी भी देते हैं ।
मंगल आपकी कुंडली में पत्नी , दैनिक व्यवसाय , बाहरी स्थानों से संपर्क एवं खर्च के स्वामी होते हैं । मंगल आपकी कुंडली में अकारक ग्रह होते हैं ।
बुध आपकी कुंडली में धन , कुटुंब का सुख , विद्या- बुद्धि एवं संतान के स्वामी होते हैं । बुद्ध आपकी कुंडली में कारक ग्रह होते हैं ।
गुरु आपकी कुंडली में आयु , बड़े भाई एवं आमदनी के स्वामी होते हैं । गुरु आपकी कुंडली में स्वास्थ्य के लिए अकारक ग्रह होते हैं परंतु यदि निर्बल हो जाए तो आमदनी में हानि , पुत्र हानि तथा धन का नाश भी करते हैं ।
शुक्र आपकी कुंडली में शारीरिक स्वास्थ्य , सौंदर्य , आयु , जीवन में उन्नति , रोग एवं शत्रु के स्वामी होते हैं । शुक्र आपकी कुंडली में कारक ग्रह होते हैं ।
शनि आपकी कुंडली में भाग्य , धर्म , उच्च शिक्षा , पिता , राज्य एवं रोजगार के स्वामी होते हैं । शनि आपकी कुंडली में राजयोग कारक ग्रह होते हैं ।
वृष राशि स्वास्थ्य: सामान्यतः यह हष्ट पुष्ट होते हैं| ऐसा भान होता है कि जैसे उनमें देवी शक्ति है| वे यंत्र संबंधी और कष्ट साध्य उद्यम के लिए अनुकूल होते हैं| वे जीवन में उत्साह की अपूर्णता की अपेक्षा प्रचुरता का उपयोग करते हैं| अन्य लोगों की अपेक्षा वे शारीरिक कष्ट के प्रति सूक्ष्म ग्राही होते हैं |वे कभी भी शारीरिक असमर्थता को स्वीकार नहीं करते हैं |यदि वे रोग ग्रस्त होते हैं तो बिना प्रकट किए दीर्घकाल तक कष्ट सहते हैं| उनकी आरोग्य संबंधी शक्तियां संतोषजनक नहीं होती है इसलिए उनको आरोग्य प्राप्ति प्रायः विलंब से होती है
रोग: साधारणतया जब कभी वृषभ राशि पीड़ित होती है तो व्यक्ति टॉन्सिल, डिप्थीरिया ,पायरिया ,तालु और कंठ की तकलीफ से पीड़ित होता है तथा शीत एवं मूर्छा से भी कष्ट पाता है |कोस्ट बाध्यता और रक्त की अधिकता तथा ऐसी दिक्कतों का सामना बढ़ती उम्र के साथ करना पड़ता है| वृषभ राशि कंठ को सूचित करती है शरीर का यही वह अंग है जो बीमारी से ग्रसित होता है |भचक्र की द्वितीय राशि होने के कारण ,चेहरे पर मुंहासे तथा चक्षु रोग सदा ही परेशानी देते हैं
आपकी राशि का स्वामी शुक्र है। वैसे यह काफी प्रभावीशाली राशि मानी जाती है। जितना मानसिक प्रेम रखते हैं उतना ही लोग भय भी रखते हैं। साधारण-सी बातचीत का अंदाज व्यवहार, भावुकता, प्रेम भावना में बदल जाता है। जिसका परोक्ष लाभ, यश मिलता है। दूसरी का विश्वास, मनमाफिकता आसान हो जाती है। स्वयं के सोच, अस्तित्व को बनाए रखना मुश्किल होता है। स्वयं को स्थापित रखते हैं। दूसरों को दर्शाते नहीं। आत्मचिंतन मानो विशेष परिस्थिति में ही करते हैं। समय पर होने अथवा रहने वाली स्थिति को महत्व देते हैं। योजनाओं का प्रभाव आकर्षण बना रहता है। किन्हीं मामलों में दूसरों की योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर कर पाते हैं। निजी मामलों में वह संभव नहीं रहता जिसका सामाजिक जातिगत, व्यक्तिगत प्रभाव रहता है। कार्यकुशलता में कमी रहती है। हिम्मत साहस, आत्मवि श्वास नहीं जुटा पाते तर्क-वितर्कता में नुकसान, विरोध, शत्रुता स्वभाव का प्रश्नचिह्न बन जाता है। पश्चाताप गंभीरता के कारण स्वयं उलझे रहते हैं नितांत निजी जीवन हताश ही रखता है आप राशि वालों को स्वभाव के गुण धर्मों से ही प्रगति, अवसरों में अवरोध आते हैं। जो भी लाभ, योग्यता, प्रतिष्ठा, सम्मान मिलता है उसे सम्हालना, निभाना आसान नहीं होता।
वर्ष 2024
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वृष राशि जातको का स्वास्थ्य
वर्ष की शुरुआत स्वास्थ्य से जुड़े मामलों के लिये शुभ नहीं है। महिलाओं को थायरॉयड सम्बन्धी परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। इसीलिये अपने खानपान और जीवनशैली पर ध्यान रखें। बृहस्पति की छठे भाव में दॄष्टि किसी पुराने रोग को दोबारा उभारने की क्षमता रखती है। बीमारियों को लेकर लापरवाही बिल्कुल न करें। प्राणायाम और दिनचर्या को सन्तुलित रखना आपके लिये इस वर्ष बेहद जरूरी है। अक्टूबर के बाद आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। अगस्त-सितम्बर का समय हृदय रोगियों के लिये ठीक नहीं है। इस दौरान वाहन चलाते समय सावधानी रखें।
आर्थिक स्थिति
वर्ष 2024 आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद सिद्ध होगा। राहू की एकादश स्थिति के कारण आपकी आय अच्छी रहेगी। पुराने निवेश से आपको काफी बड़ा धन लाभ हो सकता है। रियल एस्टेट में आप बड़ा निवेश करने का प्लान कर सकते हैं। पैतृक सम्पत्ति को लेकर कुछ विवाद हो सकते हैं। फरवरी-मार्च में ऐसे कुछ मामले उभर भी सकते हैं। मई के बाद आपके खर्चे अचानक बढ़ने की सम्भावना है। शेयर बाजार में अतिरिक्त निर्भरता आपके लिये शुभ नहीं रहेगी। वर्ष के उत्तरार्ध में कई बार आपको नकदी की समस्या होगी।
परिवार एवं सामाजिक स्थिति
इस वर्ष आपको परिजनों क़े स्वास्थ्य का काफी ध्यान रखना पड़ेगा। घर में तनाव होने की सम्भावना है। कुछ बाहरी लोग आपके परिवार की एकता को तोड़ने का प्रयास करेंगे। आपकी भावनाओं को आपके परिजन समझने में विफल हो सकते हैं। ऐसे में आपको थोड़ा धैर्य और सहनशीलता दिखानी होगी। नये मित्र बनाने से आपको बचना चाहिये। सन्तान प्राप्ति के लिये प्रयास कर रहे हैं तो आपको वर्ष के अन्त में प्रयास करना होगा। सम्पत्ति के मामलों को सावधानी पूर्वक सुलझायें।
दाम्पत्य जीवन
इस वर्ष आपके दाम्पत्य सम्बन्ध सामान्य रहेंगे। शनि की दशम दॄष्टि आपकी राशि से सातवें भाव पर पड़ेगी जिसके कारण आपको वैवाहिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। राहू की दृष्टि आपसी विश्वास को भी नुकसान पहुँचा सकती है। लेकिन आप काफी रोमान्टिक रहेंगे जिसके कारण आपका गृहस्थ जीवन सुखद हो सकता है। अतिरिक्त वैवाहिक सम्बन्ध की भी सम्भावना बन रही है। इसीलिये सम्बन्धों में पारदर्शिता सुनिश्चित रखें। वर्ष के पहले पूर्वार्ध में प्रेमीजन के साथ बात-बात पर झगड़ा होते रहने से रिश्तों में खटास आ सकती है। लेकिन गुरु के वृष में जाने से रिश्ते सम्भल जायेंगे।
शिक्षा और करियर
इस वर्ष आपको करियर में मेहनत के बाद काफी सफलता मिलेगी। अपने व्यापार में बड़ा बदलाव करने का प्रयास कर सकते हैं। जॉब में वेतन बढ़ने से आपका मनोबल बढ़ेगा। राहू की स्थिति आपको व्यापार में बड़ा लाभ दिलायेगी। आप अपने काम को लेकर समर्पित और निष्ठावान रहेंगे। अप्रैल तक विदेशी माध्यमों से भी आपको लाभ मिल सकता है। मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कारोबार में काफी लाभ होगा। वरिष्ठ अधिकारी आपका काफी सम्मान करेंगे। इस वर्ष जॉब और व्यापार को लेकर कई यात्रा करने की सम्भावना बन रही है। वर्ष के उत्तरार्ध में शनि के वक्री होने से कारोबार थोड़ा धीमा पड़ सकता है।
कुल मिलाकर 2024 वृष राशि के जातकों के लिए सामान्य भविष्यफल का समय होगा। यह वर्ष आपको स्थिरता, संतुलन, और अवधारणाओं के प्रतीक में बदलने का मौका देगा। आपको अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता और स्थिरता रखने की आवश्यकता होगी। आपको अपने कार्य में प्रतिष्ठा और मान्यता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी होगी। अपनी क्षमताओं को सुधारें और नए अवसरो का सम्मान करें। सामान्य रूप से, यह वर्ष आपके लिए समृद्धि, संतुष्टि और सफलता का समय हो सकता है।
उपाय -
(1)👉 प्रत्येक शनिवार को हनुमान जी के मन्दिर में जाकर नारियल अर्पित करें। गाय को आलू मिश्रित रोटी खिलायें।
- (2)👉 हर मंगलवार माता के मन्दिर में एक नारियल चढ़ाना तथा उस दिन श्रीदुर्गा-सप्तशती का पाठ करना शुभ होगा।
(3)👉 प्रतिदिन पक्षियों को सतनाजा डालना तथा प्रत्येक संक्रान्ति नारियल मन्दिर में प्रशाद रूप में चढ़े।
राहु का मीन राशि मे (वृष राशि का फल)गोचर का फल30 अक्टूबर, 2023 को दोपहर 14:13 बजे
राहु एक धुएं के समान है जो व्यक्ति के जीवन में भ्रम फैलाने का कार्य भी करता है। राहु का नाम कूटनीति में माहिर है इसलिए जिन लोगों को राहु की कृपा प्राप्त होती है, वे राजनीति और कूटनीति के क्षेत्र में माहिर बनते हैं लेकिन राहु बहुत जल्दी रूप बदलने वाला और तेज बुद्धि वाला है। यह व्यक्ति को भरमा (भ्रमित करना) सकता है। अगर इसके गुण और दोषों की बात की जाए तो यह तत्काल प्रभाव देने वाला ग्रह है। यह रातों-रात व्यक्ति को अमीर बना सकता है। राहु की दशा में जातक को स्वप्न में सर्प अधिक दिखाई देते हैं क्योंकि राहु का संबंध सर्प से भी माना जाता है। यह जीवन में झूठी आशाएं, अंधविश्वास और धुंधली दृष्टि भी ला सकता है।
कलयुग में तो राहु का प्रभाव और भी अधिक है। जिन जातकों पर राहु का प्रभाव अधिक होता है, वे ख्याली पुलाव पकाने वाले और दिवास्वप्न देखने वाले भी व्यक्ति हो सकते हैं। यह जातक को व्यसनों की ओर भी ले जा सकता है। किसी तरह की बुरी लत, अवैध गतिविधियां, जुआ, नशा, आदि भी राहु करा सकता है तो वहीं वर्तमान रूढ़ियों को दरकिनार करते हुए क्रांति फैलाने का काम और नवाचार भी राहु प्रदान करता है। यह सब कुछ ऐसी स्थिति पर निर्भर करता है कि आपकी कुंडली में राहु किस प्रकार फल देने वाला ग्रह बना है। आमतौर पर राहु तीसरे भाव, छठे भाव, दसवें भाव और ग्यारहवें भाव में सर्वाधिक शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह माना जाता है। यहां स्थित राहु व्यक्ति को मान-सम्मान दिलाता है। धन की प्राप्ति कराता है। शत्रुओं पर विजय दिलाता है और व्यक्ति को मजबूत व्यक्तित्व प्रदान करता है।
राहु कुंडली के जिस भाव में बैठता है, उसके प्रभाव में तत्काल वृद्धि कर देता है इसलिए यदि वह शुभ फलदायक है तो शुभ फलों में भी बढ़ोतरी कर सकता है और यदि अशुभ है तो अशुभ प्रभावों में भी बढ़ोतरी कर सकता है। राहु की एक विशेषता यह भी है कि यह जिस भी ग्रह के साथ कुंडली में स्थित हो या जिस ग्रह का प्रभाव राहु पर आ रहा हो, यदि कुंडली में कमजोर है तो उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।
राहु धीमी गति से चलने वाला ग्रह है और यह एक राशि में लगभग 18 महीनों तक रहते हैं। राहु 30 अक्टूबर, 2023 को मीन राशि में गोचर कर चुके हैं और इसके बाद वह साल 2025 में स्थान परिवर्तन कर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। राहु के गोचर का प्रभाव राशिचक्र की 12 राशियों पर पूरे साल देखने को मिलेगा।
मीन मे राहु गोचर (वृष राशि का फल)
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30 अक्टूबर को होने वाला राहु का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में होगा जो आपके लिए अत्यंत शुभ फल प्रदान करेगा। आपकी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होगी। मन में दबी हुई पुरानी इच्छाएं सामने आएंगी और वह पूरी होंगी। आपकी योजनाओं में सफलता के योग बनेंगे। उत्तम आर्थिक लाभ के योग बनेंगे और जो आप प्राप्त करना लंबे समय से चाह रहे थे, वह इस दौरान आपको प्राप्त हो जाएगा। राजनीति के क्षेत्र में भी सफलता मिलेगी और विरोधी मुंह की खाएंगे।
वृषभ राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर आपके लाभ स्थान में होगा। इस भाव में राहु का गोचर ज्योतिष की दृष्टि से बहुत ही अनुकूल कहा जाता है। इस भाव में विराजमान राहु की दृष्टि आपके सप्तम पंचम और तीसरे भाव पर होगी। राहु के इस गोचर से वृष राशि के जातक लंबे समय से जिस योजना पर काम कर रहे हैं वह अब फलीभूत होने की कगार पर होगी। राहु के इस गोचर से आपके अनियंत्रित खर्चों पर लगाम लगेगी। आपके परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन होगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी राहु का यह गोचर आपके लिए अनुकूल रहेगा। वृष राशि के जातक राहु के इस गोचर में किसी नए कार्य का शुभारंभ कर सकते हैं।
अगर आप काफी समय से अपने किसी बिजनेस पार्टनर के साथ कोई नई कंपनी खोलना चाहते थे तो अब यह संभव हो जाएगा। इस गोचर के दौरान आपके भाइयों और मित्रों से भी आपको अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारी वर्ग के लिए राहु का यह गोचर उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगा और कंपनी में अच्छा मुनाफा होगा। छात्र वर्ग के लिए या फिर जो शोध कार्यों में लगे हुए हैं उन्हें भी राहु सफलता प्रदान करने वाला होगा। राहु के इस गोचर काल में शेयर मार्केट से जुड़े जातकों को मुनाफा कमाने के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। आप अपनी संतान को उच्च शिक्षा के लिए विदेश में भी भेज सकते हैं। काफी समय से अगर आप किसी मकान का सौदा करना चाह रहे थे लेकिन धन की कमी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब राहु के इस गोचर में आप संपत्ति का क्रय भी कर सकते हैं।
आपके लिए धन लाभ के मार्ग प्रशस्त होगे। आपको इस समय किसी अप्रत्याशित स्रोत से धन लाभ होने के संकेत हैं। राहु के गोचर के प्रभाव में आपको अपनी इच्छाओं को पूरा करने का भरपूर मौका मिलेगा और आप इस समय काफी संतुष्ट और प्रसन्न महसूस करेंगे। इस समय आप पहले से ज्यादा पैसों की बचत कर पाएंगे।
आपको किसी विदेशी स्रोत से भी लाभ मिलने की संभावना है और आपकी सट्टे बाज़ार में दिलचस्पी बढ़ सकती है। राहु के गोचर काल में आपकी प्रगति की रफ्तार बहुत तेज होने वाली है। आप कोई नया निवेश कर सकते हैं और कोई नई प्रॉपर्टी खरीदने के बारे में भी सोच सकते हैं। आपको साल 2024 में अपने भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा। वहीं आपको लंबी यात्राओं पर भी जाना पड़ सकता है लेकिन अच्छी बात यह है कि ये यात्राएं आपको सफलता और प्रगति देने में सहायता करेंगी।
उपाय👉 आपको राहु ग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए राहु के मंत्र जाप करने चाहिए।
केतु 30 अक्टूबर, 2023 को दोपहर 14:13 बजे शुक्र ग्रह के प्रतिनिधित्व वाली तुला राशि से बाहर निकल कर बुध ग्रह के स्वामित्व वाली कन्या राशि में गोचर करेगा।
केतु को बहुत ही रहस्य में ग्रह माना जाता है और वैदिक ज्योतिष में भी केतु ग्रह की भविष्यवाणी सरल नहीं बताई गई है। यह जीवन में विरक्ति का कारक है और व्यक्ति को सांसारिक मोह माया से दूर हटाकर प्रभु की शरण में ले जाने का काम भी करता है। जैसा कि हमने बताया कि वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है परंतु गणितीय दृष्टिकोण से यह केवल सूर्य और चंद्रमा की परिक्रमा पथ के कटान बिंदु हैं। समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु जी के मोहिनी अवतार द्वारा स्वर्भानु नामक जिस राक्षस का सर धड़ से अलग किया गया था, वह सिर राहु और वह धड़ केतु कहलाता है। जब केतु का प्रादुर्भाव हुआ तो विभिन्न ऋषि-मुनियों द्वारा उसका लालन-पालन किया गया जबकि सिर, जिसे राहु कहते हैं, उसका पालन उसकी राक्षसी माता ने किया इसलिए राहु के अंदर राक्षसी गुणों की अधिकता पाई गई और केतु ऋषि-मुनियों के गहरे ज्ञान और अध्यात्म को पाकर उनका प्रभाव भी अपने अंदर समाहित कर बैठा। इसी वजह से केतु ग्रह को धार्मिक ग्रह भी कहा जाता है और विशेष परिस्थितियों में कुंडली में स्थित होने पर यह जीवन में जातक को मोक्ष प्रदान करने वाला ग्रह भी माना गया है।
केतु एक ऐसा ग्रह है जो व्यक्ति को पूर्व जन्म के कर्मों का भी आभास कराता है क्योंकि इसका सिर नहीं है, अतः यह कुंडली में जातक के जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव के स्वामी के अनुरूप और यदि किसी ग्रह का प्रभाव इसके ऊपर होता है तो उसके अनुरूप भी फल प्रदान करने में सक्षम होता है। जब कुंडली में केतु ग्रह की दशा आती है तब यह जातक पर अपने प्रभाव डालता है। यदि यह बृहस्पति जैसे शुभ ग्रह के साथ या उसकी दृष्टि में हो तो व्यक्ति को अत्यंत धार्मिक बनाता है। व्यक्ति तीर्थाटन करता है और अच्छे-अच्छे काम करता है लेकिन यही केतु यदि मंगल के साथ स्थित हो तो जातक को उग्र भी बना सकता है और यदि अच्छी स्थिति में न हो तो व्यक्ति को रक्त संबंधी अशुद्धि का शिकार बनाकर फोड़े - फुंसी, आदि समस्याएं भी प्रदान कर सकता है। यह विच्छेदन का ग्रह भी माना जाता है इसलिए वैवाहिक भावों में केतु ग्रह की स्थिति विवाह विच्छेद करने वाली भी मानी जाती है।
केतु एक धर्म प्रधान और कर्म प्रधान ग्रह है और यह अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के फल प्रदान करता है। राहु और केतु के प्रभाव को समझें तो व्यक्ति का कर्म प्रधान जीवन शुरुआत में राहु से और अंत में केतु से प्रभावित होता है। केतु के कारण जातक चिंतनशील विचारों से युक्त होता है और उसके अंदर गहन विश्लेषण की क्षमता आ जाती है। ऐसे व्यक्ति शोध कार्यों में जबरदस्त सफलता प्राप्त करते हैं। यह व्यक्ति को उच्च आध्यात्मिक स्थित पहुंचाने में मदद करता है और कुछ विशेष परिस्थिति में हो तो जातक को आत्मज्ञान भी प्रदान कर सकता है। यदि इसकी स्थिति अनुकूल न हो तो व्यक्ति को भ्रामक स्थिति में भी ले जा सकता है और सभी से अलग कर सकता है।
केतु का कन्या मे गोचर (वृष राशि का फल)
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30 अक्टूबर को होने वाला केतु का गोचर आपके पंचम भाव में होगा जो कि आपके प्रेम संबंधों में तनाव का कारण बन सकता है। यदि आप एक दूसरे को अच्छे से नहीं समझते तो यह समय आपके बीच गलतफहमियों को और बढ़ा देगा और आपके रिश्ते को तोड़कर भी रख सकता है क्योंकि केतु अलगाव का कारक ग्रह है और यह जीवन में विरक्ति देता है इसलिए इस गोचर के प्रभाव से आपको किसी नए संबंध में धोखा मिलने की भी संभावना रहेगी और आपका पुराना रिश्ता टूट सकता है इसलिए आपको बहुत अच्छे से संभालना होगा। विद्यार्थियों को इस गोचर का बेहद अच्छा परिणाम मिलेगा और गहन विषयों पर उनकी पकड़ मजबूत होने से उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे परिणाम भी प्राप्त होने के योग बनेंगे। विवाहित जातकों को संतान से संबंधित चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है इसलिए उन्हें अपनी संतान की सेहत से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
केतु के पांचवे भाव में होने की वजह से आपको केतु गोचर 2024 के दौरान औसत परिणाम देखने को मिलेंगे। आपको अपने प्रयासों में औसत सफलता मिलने के संकेत हैं। केतु के गोचर और इसके पांचवे भाव में मौजूद होने की वजह से आपको अपने करियर में ज्यादा सफलता नहीं मिल पाएगी।
हालांकि, केतु के पांचवे भाव में होने पर आपकी अध्यात्म की ओर रुचि बढ़ेगी और आप ईश्वर की भक्ति में लीन और समर्पित रहेंगे। ईश्वर की भक्ति से आप काफी प्रसन्न महसूस करेंगे और अगर आप आध्यात्मिक मार्ग पर हैं, तो इस क्षेत्र में आपको अपार सफलता मिलेगी। पांचवे भाव में होने पर केतु आपको गलत फैसले लेने के लिए उकसाने का काम कर सकते हैं। ये गलत फैसले आपको किसी मुश्किल में भी डाल सकते हैं इसलिए आप इस समय थोड़ा संभलकर रहें।
केतु के पांचवे भाव में उपस्थित होने पर आप अपनी संतान के विकास और खुशहाली को लेकर बेवजह चिंतित हो सकते हैं। वहीं बहुत ज्यादा तनाव लेने की वजह से आपको तेज सिरदर्द आदि की शिकायत भी हो सकती है। हालांकि, इस गोचर के दौरान आपकी बुद्धि में वृद्धि होगी।
पांचवे घर में केतु की उपस्थिति के चलते इस राशि के छात्र जातकों को पढ़ाई में रूकावटों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा प्रेम में पड़े जातकों के लिए भी यह समय ज्यादा अनुकूल नहीं रहेगा क्योंकि मुमकिन है कि आपको अपने साथी के साथ अलगाव और असंतुष्टि की भावना महसूस हो।
गर्भवती महिलाओं को इस दौरान ज्यादा सावधान रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि 2024 में पांचवें घर में केतु गोचर आपकी गर्भावस्था में कुछ परेशानियां पैदा कर सकता है। जो जातक अपने परिवार का विस्तार करने की योजना बना रहे थे उन्हें साल के पहले भाग में अपनी इस योजना को स्थगित करने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह समय आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाला है। जिन जातकों के पहले से ही संतान हैं वह अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को थोड़ा नजरअंदाज कर सकते हैं और धन संपत्ति की तरफ ज्यादा झुकाव रख सकते हैं।
वृषभ राशि के बुजुर्ग जातकों को अपनी मांगों और इच्छाओं के चलते अपने बच्चों के साथ कुछ परेशानियां और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वह इसे प्राथमिकता नहीं देंगे और सामाजिक मानदंडों के बारे में ज्यादा चिंतित रहेंगे। हालांकि 1 मई 2024 के बाद बृहस्पति आपके लग्न भाव में गोचर कर जाएगा और आपके पंचम भाव पर दृष्टि डालेगा। इससे केतु आपको उन समस्याओं से थोड़ी राहत देंगे जिनका आप अभी तक जीवन में सामना कर रहे थे। हालांकि क्योंकि आपके लग्न स्वामी शुक्र से केतु की शत्रुता है और आठवें घर का आधिपत्य है इसीलिए आप इस गोचर से ज्यादा अनुकूल परिणाम नहीं प्राप्त कर पाएंगे लेकिन विशेष तौर पर शोध कर रहे छात्रों, पीएचडी वाले छात्रों के लिए यह समय फलदाई साबित होगा। साथ ही जो लोग गुप्त विज्ञान सीखना चाहते हैं उनके लिए भी यह समय शुभ रहने वाला है।
उपाय👉 किसी ज़रूरतमंद को भूरे रंग के वस्त्र दान करें।